एकता

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एकता जिन्दाबाद

Published 2 માર્ચ, 2011 by Muni Mitranandsagar (મુનિ મિત્રાનંદસાગર)

आइये, हम गटर को और गंगा को एक कर डालें!

आइये, हम दूध और दही को एक कर डालें!

आइये, हम घी और तेल को एक कर डालें!

आइये, हम नमक और चीनी को एक कर डालें!

आइये, हम जवाहरात को और मिट्टी को एक कर डालें!

आइये, हम कूड़ा-करकट और फूलों की गठरी को एक कर डालें!

आइये, हम सोना-पीतल एक कर डालें!

आइये, हम लफंगों और सज्जनों को एक कर डालें!

आओ, जोरों से नारा लगाओ. “एकता हमारा जीवनमंत्र है!”

जो जैन धर्म के धुरन्धर, नामी, आगमधर, शासन को हर रौम में बसाने वाले आचार्य नहीं कर पाये, वो हम ‘बच्चे’ कर डालेंगे.

हम मुंह बंद रखेंगे, हम आंखें मूंद लेंगे, हम कान बंद रखेंगे, हम दिमाग बंद रखेंगे, हम हर हालत में सोचना बंद कर देंगे, मगर हम एकता सिद्ध करके ही रहेंगे.

[तालियाँ, जोरों से तालियाँ…!!!]

मुनि मित्रानंदसागर
2 मार्च, 2011.